The art of breathing | स्वर विज्ञान

 The art of breathing

स्वर विज्ञान


"कोई ख़ास तनाव भी नहीं है, कोई वजह भी नहीं है, बस मन ऊब गया है"

दिवाली के बाद से मैं बहुत थका-थका सा फील कर रहा था।  रूटीन से मन ऊब रहा था।  कुछ नया था नहीं करने को।  वही दिनचर्या, वही tasks , nothing new .

बस मैंने ये पढ़ लिया था कि मेरी राशि में ट्रांजिट हो रहा है। सूर्य आ रहा है।  16 नवम्बर से।  मैं इसी में ही खुश हो रहा था कि कुछ तो चेंज हो रहा है, चाहे जन्मपत्री में ही सही।  मुझे विश्वास सा हो चला था कि इससे शायद मेरी लाइफ में भी कुछ झन्नाटेदार होने वाला है और ये टेम्पररी ऊबना हट जायेगा। 

जो vibrations मैं अपने आपको दे रहा था, वो रंग तो ज़रूर लाएंगी मुझे विश्वास था।  कल रात सोते-सोते मैंने सूरज भाई जी की एक क्लास सुनी जिसमे उन्होंने कहा कि जैसी भी situation हो, पर vibrations चेक करो और रिफिल करो।  नेगेटिव स्थिति में भी पॉजिटिव vibrations बहुत अच्छा काम करती है। 

आज सुबह उठने पर गौरी ने मुझे बताया की आपके मोबाइल पर स्वर विज्ञानं की वीडियो का लिंक छोड़ दिया है।  मैंने पहले तो ignore करने का सोचा क्यूंकि इससे पहले भी वह मुझे कई लिंक्स भेजती थी, पर मैं इग्नोर कर देता था।  पर इस बार मैंने सोचा, कहीं ये कोई इशारा तो नहीं।  कहीं ये कोई hint तो नहीं, change होने का।  मैंने मन में लिंक जोड़ना शुरू कर दिया और उसको हाँ कह दी और कहा कि मैं रास्ते में ये वीडियो देख लूंगा।  खुश हो गई वो भी, कि आज मेरी बात कैसे मान ली। 

खैर, ऑफिस जाते समय मैंने वो लिंक लगा लिया और सुनने में आसान और अच्छा लगा।  बहुत सरल सरल से उपाय  बताये जा रहे थे श्वास के बारे में।  

क्या है स्वर विज्ञान ?

स्वर विज्ञान - कहते हैं कि ये पौराणिक साइंस है और शंकर-पार्वती से इसकी शुरुआत हुई।  इसका ज़िक्र शिव स्वरोदय नामक ग्रन्थ में आता है जो कि एक तांत्रिक ग्रन्थ है। यह ग्रन्थ शिव और पार्वती के संवाद के रूप में है।  इसमें 395 श्लोक हैं।  इसमें साँसों के आने-जाने पर क्या प्रतिक्रिया होती है और उसको रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में कैसे इस्तेमाल कर सकते है बताया गया है।   हालाँकि मुझे ये किताब नहीं मिली, पर जो उस वीडियो में बताया वही मैं यहाँ पर विस्तार के साथ लिख रहा हूँ।  तो, पढ़ते रहे और आनंद लेते रहे। 


to be continued..

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