समय - भरना या खाली करना

समय - भरना या खाली करना 

(By Sri Pundrik Ji Maharaj)


एक बहुत बड़ी जनसँख्या है विश्व की,  जिसके लिए समय ही सबसे बड़ी समस्या है। 

वो, अपने समय को भरने की कोशिश कर रहा है।  

दोनों प्रकार के लोग हैं, कुछ लोग हैं जो समय को भरने की कोशिश कर रहे हैं, कुछ हैं जो समय को खाली करने की कोशिश कर रहे हैं, और दोनों चीज़ में जटिलता है। 

कई लोग है, प्रतीक्षा करते हैं, खाली दिन है कैसे भी भर जावे। 

तो, या तो वह लोग हैं जिनके पास काफी समय है या दूसरे वाले।  टाइम मिल जाए बस।  अगर पूछो तो बहुत व्यस्त  हैं, पर कहाँ, ये पता नहीं। जिस चीज़ में आप व्यस्त हो, वह चीज़ जब समाप्त होगी तभी तो समय निकलेगा। कई बार रूचि भी इस चीज़ का निर्णय करती है।   कभी ऐसा होता है कि समय अत्यंत सहज होता है, वो जटिल नहीं होता। जब बहुत ज्यादा हो तब भी जटिल, जब न हो, तब भी जटिल। बहुत हो तो भरने की कोशिश होती है और नहीं हो तो खाली करने की कोशिश होती है।  और दोनों ही जटिल प्रक्रियाएं हैं। क्यूंकि इसमें कितना भी प्रयास कर लीजिये, कुछ न कुछ छोड़ना होगा। कोई न कोई उस क्रिया में असहज होगा ही होगा। किसी न किसी के ध्यान में वो बात आएगी।  

कभी कभी ऐसा होता है की समय प्रवाहित सा होता दिखता है। आप सबने अनुभव किया होगा कि जीवन में कोई समय आता है जब हम भरने और खाली करने की क्रिया से मुक्त होते हैं, समय सहज सा प्राविहत होता है।   खासकर धार्मिक आयोजनों में।  किसी कथा में, कभी एहसास नहीं होता की घंटों बीत गए, टाइम लैप्स हो गया। 

जब समय सहजता से प्रवाहित होता है, वो स्थिति आनंद की होती है। 

सुख और दुःख इन दोनों परिस्थितियों में समय का रुख कुछ अलग प्रकार से चलता है।  दुःख, समय को सदा लम्बा करता है, सुख समय को सदा छोटा करता है। दुःख में आयु बहुत लम्बी लगती है।  पर जब प्रवाह होता है, तब समय बिताना नहीं पड़ता, वो सहजता से एक एक शब्द का, एक एक चीज़ का अनुभव करता चलता है और बहता चलता है, बहता चलता है। इसी स्थिति का नाम वर्तमान है और ये स्थिति न सुख की है, न दुःख की।  ये स्थिति आनंद की है। 

इसलिए जब भी हम किसी आध्यात्मिक उपासना में होते हैं, तो जो वस्तु आकृषित करती है , वो आनंद है। आनंदमयी प्रयास।  क्या आया ये नहीं पता, आया कहाँ से ? आया वो भीतर से ही, पर कथा ने भीतर छुपे हुए इस आनंद के द्वार को खोला। बाहर से नहीं आया।  जैसे कभी कभी हम घर की खिड़की खोल देते हैं तो वह से हवा आ जाती है , ऐसे ही हमारे भीतर आनंद की एक खिड़की है और इस दुनिया में कोई साधन नहीं है जो उस आनंद की खिड़की को खोल सकता है।  साधन - सुख और दुःख की खिड़की खोल सकता है, इसलिए दुनिया में ये आपको भरपूर मिलेंगी, मौसम की तरह मिलेंगे, ये नेचुरल बात है। 


।।इति।।  

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