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Showing posts from November, 2024

समय - भरना या खाली करना

समय - भरना या खाली करना  (By Sri Pundrik Ji Maharaj) एक बहुत बड़ी जनसँख्या है विश्व की,  जिसके लिए समय ही सबसे बड़ी समस्या है।  वो, अपने समय को भरने की कोशिश कर रहा है।   दोनों प्रकार के लोग हैं, कुछ लोग हैं जो समय को भरने की कोशिश कर रहे हैं, कुछ हैं जो समय को खाली करने की कोशिश कर रहे हैं, और दोनों चीज़ में जटिलता है।  कई लोग है, प्रतीक्षा करते हैं, खाली दिन है कैसे भी भर जावे।  तो, या तो वह लोग हैं जिनके पास काफी समय है या दूसरे वाले।  टाइम मिल जाए बस।  अगर पूछो तो बहुत व्यस्त  हैं, पर कहाँ, ये पता नहीं। जिस चीज़ में आप व्यस्त हो, वह चीज़ जब समाप्त होगी तभी तो समय निकलेगा। कई बार रूचि भी इस चीज़ का निर्णय करती है।   कभी ऐसा होता है कि समय अत्यंत सहज होता है, वो जटिल नहीं होता। जब बहुत ज्यादा हो तब भी जटिल, जब न हो, तब भी जटिल। बहुत हो तो भरने की कोशिश होती है और नहीं हो तो खाली करने की कोशिश होती है।  और दोनों ही जटिल प्रक्रियाएं हैं। क्यूंकि इसमें कितना भी प्रयास कर लीजिये, कुछ न कुछ छोड़ना होगा। कोई न कोई उस क्रिया में ...

Braj Ras

 Daily journal 18-nov Braj Ras आज सुबह पेपर में ब्रज रस का प्रोग्राम देखा।  शाम 5 बजे से।  अक्सर मैं ऑफिस से निकलने के बहाने ढूंढ़ता रहता था क्यूंकि ऑफिस में पूरा टाइम बिताना अपने आप में एक सजा थी।  ऐसा सन्नाटेदार ऑफिस का मेरा पहला अनुभव था।  Pin Drop साइलेंस।  अपनी आवाज़ अपने आप को ही सुनती।  काम ज्यादा नहीं था ऑफिस में।  सब अपने earphones लगा कर बैठे रहते और समय के ख़तम होने का इंतज़ार करते रहते।  मेरे जितना दम किसी में न था जो अपनी छुट्टी का बलिदान कर ऑफिस से निकल जाता था।  पर मेरे को ऐसे FREE बैठना अच्छा नहीं लगता था।  लगता था मानो कोई चीज़ कचोट रही हो अंदर से।  भागने का मन करता था मेरा। कई बार ये जॉब छोड़ने की सोची पर हिम्मत नहीं  जुटा पा रहा था।   ड्रग्स है न - सैलरी।  इस ड्रग का मैं आदि हो चुका था।   जब कुछ न बन पा रहा था तब मैंने ऐसे ही मज़े लेने की सोची।  अक्सर मैं ऑफिस से जल्दी भाग जाता था। Yes. भागना ही सही शब्द है।  अपने आपको भगाना पड़ता था इस atmosphere  से।  समय को इस्तेमा...

The art of breathing | स्वर विज्ञान

 The art of breathing स्वर विज्ञान "कोई ख़ास तनाव भी नहीं है, कोई वजह भी नहीं है, बस मन ऊब गया है" दिवाली के बाद से मैं बहुत थका-थका सा फील कर रहा था।  रूटीन से मन ऊब रहा था।  कुछ नया था नहीं करने को।  वही दिनचर्या, वही tasks , nothing new . बस मैंने ये पढ़ लिया था कि मेरी राशि में ट्रांजिट हो रहा है। सूर्य आ रहा है।  16 नवम्बर से।  मैं इसी में ही खुश हो रहा था कि कुछ तो चेंज हो रहा है, चाहे जन्मपत्री में ही सही।  मुझे विश्वास सा हो चला था कि इससे शायद मेरी लाइफ में भी कुछ झन्नाटेदार होने वाला है और ये टेम्पररी ऊबना हट जायेगा।  जो vibrations मैं अपने आपको दे रहा था, वो रंग तो ज़रूर लाएंगी मुझे विश्वास था।  कल रात सोते-सोते मैंने सूरज भाई जी की एक क्लास सुनी जिसमे उन्होंने कहा कि जैसी भी situation हो, पर vibrations चेक करो और रिफिल करो।  नेगेटिव स्थिति में भी पॉजिटिव vibrations बहुत अच्छा काम करती है।   आज सुबह उठने पर गौरी ने मुझे बताया की आपके मोबाइल पर स्वर विज्ञानं की वीडियो का लिंक छोड़ दिया है।  मैंने पहले तो ignore करने का सो...